आज हम बात करने जा रहे हैं समाजवादी विचारधारा के एक ऐसे प्रखर नेता की, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। हम बात कर रहे हैं स्वर्गीय बृजभूषण तिवारी जी की, जिनका राजनीतिक और सामाजिक जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा की मिसाल रहा है।
बृजभूषण तिवारी जी का जन्म 13 अक्टूबर 1941 को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद के ग्राम उमई में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री राम सूरत तिवारी और माता का नाम गायत्री देवी था। उन्होंने गोरखपुर के सेंट एंड्रयूज कॉलेज से स्नातक तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. और एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त की।
छात्र जीवन से ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में रही। डॉ. राम मनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र जैसे समाजवादी नेताओं के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने समाजवादी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
वर्ष 1963 में वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के महामंत्री बने और 1964-65 में अध्यक्ष चुने गए। अंग्रेजी हटाओ आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ते रहे।
आपातकाल के दौरान वर्ष 1975 में उन्होंने इसका विरोध किया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। लगभग 18 महीने जेल में रहने के बावजूद उनके विचारों और सिद्धांतों में कोई कमी नहीं आई।
वर्ष 1977 में वे छठी लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद 1989 में नौवीं और 1996 में ग्यारहवीं लोकसभा के सदस्य बने। दिसंबर 2006 में वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और वर्ष 2012 में दोबारा राज्यसभा के लिए चुने गए।
बृजभूषण तिवारी जी ने विभिन्न संसदीय समितियों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे और पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समाजवादी आंदोलन को मजबूत करने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।
वे केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि पढ़ने-लिखने, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में गहरी रुचि रखने वाले व्यक्तित्व भी थे। उनका मानना था कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और वंचित वर्ग सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
उनके जीवन से जुड़ी एक प्रेरक पंक्ति है—
“जाति-पांति से बड़ा धर्म है,
धर्म-ध्यान से बड़ा कर्म है,
कर्म-कांड से बड़ा मर्म है,
मगर सभी से बड़ा यह छोटा-सा इंसान है,
और अगर वह प्यार करे तो धरती स्वर्ग समान है।” स्वर्गीय बृजभूषण तिवारी जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची राजनीति सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और आम जनता की सेवा करने का संकल्प है।ऐसे संघर्षशील, विचारशील और समर्पित समाजवादी नेता को नेत्रा 24 टाइम्स की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।
