दिनांक 30 जून, 2026 को जिला कारागार सिद्धार्थनगर का त्रैमासिक निरीक्षण माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेसिक शिक्षा अधिकारी, विजिटर बोर्ड के सदस्य तथा अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कारागार की सुरक्षा व्यवस्था, पुरुष एवं महिला बैरकों, चिकित्सालय, भोजनालय, रसोईघर, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल, बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं तथा अभिलेखों का गहन निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कारागार परिसर की साफ-सफाई, अनुशासन एवं व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान बंदियों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी भी प्राप्त की गई तथा संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण दल ने कारागार में संचालित शिक्षा, कौशल विकास, योग, पुस्तकालय तथा अन्य सुधारात्मक गतिविधियों का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार एवं पुनर्वास का केंद्र है। शिक्षा और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ने का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निरीक्षण के उपरांत कारागार परिसर में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शिव नाडार फाउंडेशन एवं जेल अधीक्षक के सहयोग से अध्ययनरत बंदियों को शैक्षणिक किट एवं प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपने करकमलों से बंदियों को शैक्षणिक किट एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए तथा उन्हें शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है और प्रत्येक व्यक्ति को सीखने का अवसर मिलना चाहिए।
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप कारागारों में सुधारात्मक एवं पुनर्वास संबंधी गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षा, कौशल विकास और नैतिक मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम बंदियों के भविष्य को नई दिशा प्रदान करते हैं तथा समाज में उनकी सम्मानजनक पुनर्स्थापना में सहायक सिद्ध होते हैं।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि अनुशासन, सकारात्मक सोच एवं शिक्षा व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन का आधार हैं। उन्होंने बंदियों से कारागार में संचालित सभी रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करने तथा उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बंदियों को उनके विधिक अधिकारों एवं निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी देते हुए कहा कि पात्र बंदियों को न्याय दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव प्रतिबद्ध है। उन्होंने बंदियों को विधिक जागरूकता कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कारागार में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोलती है। उन्होंने अध्ययनरत बंदियों की लगन की प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी हर संभव शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने शिव नाडार फाउंडेशन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दिए जा रहे सहयोग की सराहना की और कहा कि समाजसेवी संस्थाओं की सहभागिता से बंदियों के पुनर्वास एवं व्यक्तित्व विकास के प्रयास और अधिक प्रभावी बनते हैं। शैक्षणिक किट एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले बंदियों ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नियमित अध्ययन जारी रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में जेल अधीक्षक ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिला कारागार सिद्धार्थनगर में बंदियों के शैक्षणिक, मानसिक, नैतिक एवं सामाजिक विकास के लिए निरंतर विभिन्न सुधारात्मक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी विभिन्न विभागों एवं समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे बंदियों के पुनर्वास, आत्मनिर्भरता एवं समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक पुनर्स्थापना के उद्देश्य को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
