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सिद्धार्थनगर

सही मायने में गृहस्थी की सच्ची खुशी औलाद की मुस्कान से ही होती है पूरी : सर्जन डॉ0 रूही परवीन

आज के दौर में बदलती जीवनशैली और तनाव के कारण बांझपन (Infertility) एक गम्भीर समस्या बनकर उभरा है। ऐसे में सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ स्थित डॉ0 अंसारी हॉस्पिटल की मशहूर स्त्री रोग विशेषज्ञ सर्जन डॉ0 रूही परवीन नि:संतान दम्पत्तियों के लिए आशा की एक नई किरण साबित हो रही हैं। सर्जन डॉ0 रूही परवीन ने बांझपन के बारें में बताया कि किसी दम्पत्ति का गर्भधारण करने और सन्तान उत्पन्न करने में असमर्थ होना। बांझपन को बिना गर्भनिरोधक के नियमित यौन सम्बन्ध बनाने के एक वर्ष के बाद गर्भधारण न कर पाने या गर्भावस्था को जीवित बच्चे के जन्म तक न पहुंचा पाने के रूप में परिभाषित किया जाता है। बांझपन पुरुष या महिला दोनों को प्रभावित कर सकता है और इसके कई कारण हो सकते हैं।
महिलाओं में बांझपन के प्रमुख कारण हैं :
PCOD/PCOS : महिलाओं में हार्मोनल असन्तुलन के कारण अण्डों का सही समय पर न बनना।

  1.  फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉक : ट्यूब बन्द होने के कारण गर्भधारण में समस्या।
  2.  एण्डोमेट्रियोसिस : गर्भाशय की आन्तरिक परत से जुड़ी समस्याएं।
  3.  बढ़ती उम्र और तनाव : कैरियर की भागदौड़ और मानसिक तनाव का प्रजनन क्षमता पर बुरा असर।
  4.  खराब जीवनशैली : जंक फूड का अधिक सेवन और व्यायाम की कमी।
    सर्जन डॉ0 रुही परवीन ने यह भी बताया कि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जब महिलाओं की रिपोर्ट्स जैसे अल्ट्रासाउण्ड, ट्यूब टेस्ट और हार्मोन बिल्कुल नॉर्मल हों, फिर भी वह माँ नहीं बन पातीं यानी गर्भधारण न हो तो ऐसी स्थिति में निम्न पहलुओं पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। जैसे
    पुरुष बांझपन (Male Infertility) :
    शुक्राणुओं की संख्या में कमी (Low Sperm Count) और शुक्राणुओं गतिशीलता (Motility) का कम होना या बनावट में खराबी।
    अनएक्सप्लेन्ड इनफर्टिलिटी (Unexplained Infertility) :
    अण्डे और शुक्राणु का सही मिलन न होना या निषेचन (Fertilization) में कोई सूक्ष्म तकनीकी बाधा।
    गर्भाशय का वातावरण :
    गर्भाशय की आन्तरिक परत (Endometrium) भ्रूण को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होती।
    तनाव और मानसिक अवरोध :
    अत्यधिक तनाव शरीर के भीतर ऐसे बायोकेमिकल बदलाव लाता है, जो गर्भधारण की प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं।
    सर्जन डॉ0 रुही परवीन ने आगे बताया कि एक दम्पत्ति जो अपने बच्चे को इस दुनिया में देखना चाहता है तो उसके लिए प्राउड मोमेंट्स कैसे है सम्भव के बारें में कहा कि इलाज के दौरान हमारी पूरी कोशिश होती है कि हम हसबैंड और वाइफ दोनों के ही रिपोर्ट्स निकालते हैं। दोनों को ही दवाओं, फिजिकल फिटनेस के सहारे गर्भधारण प्रक्रिया तक पहुंचाते है और यही नहीं इलाज के दौरान गर्भ में पल रहे बेबी की भी निगरानी पूरे नौ महीने या यूं कहें बच्चे के जन्म। वहीं इलाज दौरान मरीज को बहुत धैर्य रखने की जरूरत है।
    आधुनिक तकनीक और अनुभव का संगम :
    सर्जन डॉ0 रुही परवीन ने बताया कि हमारे शोहरतगढ़़ स्थित डॉ0 अंसारी हॉस्पिटल जो अपनी उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और मेरे कुशल मार्गदर्शन के लिए पूरे क्षेत्र में जाना जाता है। कहा कि अपनी संवेदनशीलता और सटीक निदान (Diagnosis) के लिए मशहूर हैं। वहीं बांझपन से जूझ रही महिलाओं का न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक उपचार भी करती हैं। उन्होंने कहा कि मेरे डॉ0 अंसारी हॉस्पिटल में बांझपन के कारणों का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि बांझपन अब लाइलाज नहीं है। सही समय पर परामर्श और आधुनिक चिकित्सा पद्धति से अधिकांश मामलों में गर्भधारण सम्भव है।
    सटीक परामर्श :
    मरीज़ की मेडिकल हिस्ट्री का गहराई से अध्ययन।
    जटिल केसों का समाधान : पीसीओडी (PCOD), हार्मोनल असन्तुलन और बार-बार होने वाले गर्भपात जैसे मामलों में उच्च सफलता दर।
    किफायती इलाज : ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के मरीजों के लिए उच्च स्तरीय इलाज को बजट के भीतर उपलब्ध कराना।
    क्षेत्र में शोहरतगढ़़ स्थित डॉ0 अंसारी हॉस्पिटल की मशहूर सर्जन डॉ0 रुही परवीन का बढ़ता विश्वास :
    शोहरतगढ़़ स्थित डॉ0 अंसारी हॉस्पिटल में केवल सिद्धार्थनगर ही नहीं, बल्कि आस-पास के जिलों और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल की सफलता की कहानियां सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी रहती हैं, जहां कई परिवारों ने वर्षों के इंतजार के बाद सन्तान सुख प्राप्त किया है। आधुनिक चिकित्सा और अपने दशकों के अनुभव से सर्जन डॉ0 रूही ने उन सूने आंगनों को खुशियों से भरा है, जहां सन्तान का सुख केवल एक अधूरा सपना बनकर रह गया था। सर्जन डॉ0 रूही का मिशन केवल इलाज करना नहीं, बल्कि हर निराश दम्पत्ति की गोद भरकर उन्हें जीवन की सबसे अनमोल सौगात देना है। उनका मानना है कि बांझपन के इलाज में धैर्य और डॉक्टर पर विश्वास सबसे जरूरी है। वह महिलाओं को जागरूक करते हुए बताया कि सामाजिक लोकलाज को छोड़कर समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना ही मातृत्व का मार्ग प्रशस्त करता है।

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