सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय स्थित साड़ी तिराहे के पास डॉ. संजय चौधरी हॉस्पिटल इन दिनों चर्चा में।
सवाल बड़ा, आखिर डॉ. संजय चौधरी हॉस्पिटल चर्चा में क्यों?
बात करें बाल रोग विशेषज्ञ डॉ संजय चौधरी की तो वह सरकारी पेशे में डाक्टर चौधरी, लेकिन खुद अपना निजी अस्पताल चलाते हैं। सरकारी आय और प्राइवेट आय की तुलना करें तो प्राइवेट आय ज्यादा होने से सरकारी हास्पिटल में कम रूचि रखते हैं।
अब बात करे मुद्दे की तो शनिवार सुबह दो साल की बच्ची की इलाज के दौरान ओवर डोज देने से बच्ची सोई मौत की नींद। बच्ची की मां ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी पर ओवरडोज इंजेक्शन लगाये जाने का आरोप लगाते हुए एक हाथ में बच्चा लिए हुए और दूसरी ओर उस बच्चे की मां अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।
सूचना पर सिद्धार्थनगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने में जुट गई। देखते देखते पुलिस और जनता का जमावड़ा बढ़ गया
परिजन बच्ची का शव गोद में लेकर अस्पताल परिसर में बैठे गये।
मृतक बच्ची की पहचान जया के रूप में हुई है। वह कठेला समयमाता थाना क्षेत्र कटेला गर्बी गांव की रहने वाली थी। मां के मुताबिक, शुक्रवार को जया को बुखार की शिकायत होने पर डॉ. संजय चौधरी के अस्पताल लाया गया था। डॉक्टर ने जांच के बाद पांच दिन की दवा दी थी। परिजनों का कहना है कि एक दिन तक दवा देने के बावजूद बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद शनिवार सुबह परिजन दोबारा बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे।
मां का आरोप है कि अस्पताल में बच्ची को इंजेक्शन लगाया गया। इंजेक्शन लगने के तत्काल बाद उसकी हालत बिगड़ी और कुछ ही देर में बच्ची मौत की नींद सो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और इंजेक्शन की अधिक मात्रा दिए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
क्या कारण था कि डॉ ने पर्ची फाड़ा.
मां ने यह भी आरोप लगाया कि बच्ची की मौत के बाद डॉक्टर ने पर्ची फाड़कर डस्टबिन में फेंक दी।
आरोपों पर डॉक्टर ने कहा- बच्ची पैदाइशी विकलांग व शारीरिक व मानसिक दोनों रूप से विकलांग थी जिसका इलाज गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से चल रही था। लगभग एक व डेढ़ साल से इलाज चल रहा था।
डॉक्टर के अनुसार, शनिवार सुबह बच्ची को अस्पताल लाया गया, तेज बुखार होने के कारण उसे भर्ती किया गया था, उसे सांस लेने में दिक्कत थी।
चाहे तो परिजन से पूंछ सकते हैं और मामला जांच का विषय है।
डॉक्टर ने बड़ी सफाई से कहते हुए निकल गये।
लेकिन परिजनों ने हंगामा करते हुए आरोप डाक्टर पर मंढ दिया।
दो महीने पहले पिता की दुर्घटना में हुई थी मौत
परिजनों के मुताबिक, जया के पिता शैलेश की करीब दो महीने पहले मौत हो गई थी। परिवार पहले से ही सदमे में था। अब जया की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
बच्ची की मौत के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। मृतका की मां और अन्य परिजन शव को गोद में लेकर बैठे रहे और इलाज को लेकर सवाल उठाते रहे। पुलिस परिजनों से बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। फिलहाल बच्ची की मौत की वास्तविक वजह क्या रही, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। परिजनों के आरोपों की पुष्टि भी जांच और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही खुल पायेगी सच्चाई।
