सिद्धार्थनगर तहसील बांसी के ग्राम सिकटा, तप्पा असनार, परगना बांसी पूरब में चकबंदी प्रक्रिया के अंतर्गत धारा-52 के प्रकाशन से पूर्व चकबंदी विचार-विमर्श गोष्ठी का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी न्यायिक/ उपसंचालक चकबंदी डॉ. ज्ञान प्रकाश ने की। इस दौरान ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं और उनके निस्तारण को लेकर अधिकारियों ने विचार-विमर्श किया।
ग्राम सिकटा में चकबंदी प्रक्रिया धारा-4 के प्रकाशन के साथ शुरू हुई थी। प्रक्रिया के दौरान स्थल पर तरमीम एवं पड़ताल का कार्य कर भू-चित्र को दुरुस्त किया गया। तस्दीक खतौनी के बाद मिली त्रुटियों को नियमानुसार संशोधित कर पुनरीक्षित वार्षिक खतौनी एवं जोत चकबंदी आकार पत्र-11 तैयार किया गया। इसके बाद चक निर्माण की प्रक्रिया पूरी करते हुए किसानों को उनके प्रस्तावित चकों की जानकारी आकार पत्र-23 के माध्यम से दी गई।
कृषकों द्वारा प्रस्तुत आपत्तियों एवं अपीलों के निस्तारण के बाद ग्राम का सीमांकन कराया गया और 30 जून 2023 को किसानों को उनके नए चकों पर कब्जा दिलाया गया। अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया को कब्जा परिवर्तन कहा जाता है।
चकबंदी के दौरान प्रत्येक चकदार को मुख्य मार्ग, चकमार्ग और आवश्यकतानुसार चक नालियों से जोड़ा गया। वहीं ग्रामीणों की मांग और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए सामान्य आबादी, अनुसूचित जाति आबादी, बारात घर, कब्रिस्तान, श्मशान और सार्वजनिक रास्तों के लिए भूमि आरक्षित की गई।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम के अंतिम अभिलेख तैयार किए जाने के बाद जोत चकबंदी आकार पत्र-45 के उद्धरण का वितरण भी किया गया। इसमें काश्तकारों के नए गाटों की जानकारी दर्ज है। 21 अगस्त 2026 को अपर जिलाधिकारी/उपसंचालक चकबंदी सिद्धार्थनगर द्वारा ग्रामीणों को इन अभिलेखों का वितरण किया गया।
बैठक में डॉ. ज्ञान प्रकाश ने ग्रामीणों से चकबंदी प्रक्रिया के दौरान बची समस्याओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चकबंदी का उद्देश्य किसानों की भूमि संबंधी समस्याओं का समाधान करने के साथ-साथ गांव में बेहतर आवागमन और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए व्यवस्थित भूमि उपलब्ध कराना है।
इस अवसर पर सहायक चकबंदी अधिकारी रामनगर रियाजत अली, चकबंदीकर्ता रवींद्र सिंह, चकबंदी लेखपाल मोहन, प्रधान प्रतिनिधि विनोद चौधरी, सदानंद चौधरी, काशीराम, दीपक कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
