वरिष्ठ सांसद Jagdambika Pal ने आज लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए सरकार की आर्थिक नीति और वित्तीय दृष्टिकोण का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक विकास, वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच संतुलन स्थापित करता है। चर्चा के दौरान श्री पाल ने कहा कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे सड़कों, रेलवे और लॉजिस्टिक्स जैसी दीर्घकालिक परिसंपत्तियों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राजकोषीय घाटा नियंत्रित है और एक स्पष्ट रोडमैप के तहत घटाया जा रहा है, जो विपक्ष के आरोपों को निराधार साबित करता है। उन्होंने कर आधार (Tax Base) के विस्तार पर भी जोर दिया और बताया कि आयकर रिटर्न (ITR) भरने वालों की संख्या में वृद्धि तथा प्रत्यक्ष कर संग्रह में बढ़ोतरी, अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण और मध्यम वर्ग के विस्तार का संकेत है। उन्होंने कहा, “यह आम आदमी पर बोझ नहीं, बल्कि बढ़ती आय, पारदर्शिता और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का प्रमाण है।” विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देते हुए श्री पाल ने कहा कि बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में तर्कसंगत बदलाव घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए किए गए हैं। कच्चे माल को सस्ता कर उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि तैयार माल पर संरक्षण जारी है। उन्होंने मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता को इसका उदाहरण बताया। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की नीतियाँ भविष्य उन्मुख हैं—चाहे वह डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा, MSMEs या कृषि क्षेत्र हो—सभी का उद्देश्य रोजगार सृजन और भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाना है। श्री पाल ने वित्तीय प्रबंधन पर विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय जहाँ नीति अस्थिरता और निवेशकों के बीच अविश्वास था, वहीं वर्तमान सरकार ने पारदर्शिता, स्थिरता और निवेश-अनुकूल वातावरण स्थापित किया है। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा कि यह वित्त विधेयक केवल एक बजटीय दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत को उच्च विकास, लचीली और समावेशी अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाला एक स्पष्ट रोडमैप है।
