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बंद कमरे में खामोश हो गईं जांबाज थानेदार की सांसें, सरकारी आवास में फंदे से झूले SHO सूर्य प्रकाश सिंह; परिजनों में मची चीख-पुकारमिशन शक्ति फेज 5.0 (द्वितीय चरण) अभियान के तहत थाना जोगिया उदयपुर मिशन शक्ति टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम- भीटियाराजा में बहू-बेटी सम्मेलन व साइबर जागरूकता अभियान के तहत चौपाल लगाकर महिलाओं/बालिकाओं को महिला अपराध व उससे बचाव के सम्बन्ध मे जागरूक किया गया मिशन शक्ति फेज 5(ii) अभियान, नारी सुरक्षा, साइबर जागरूकता, बेटी बहू सम्मेलन के तहत थाना भवानीगंज मिशन शक्ति टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम चकफतवा में महिलाओं(बहुओं) बच्चियों को एकत्रित कर चौपाल लगाकर बालिकाओं/महिलाओं को मिशन शक्ति के तहत सरकार के विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे मे जानकारी दिया गया व अपना बचाव कैसे किया जाए सेल्फ़ डिफ़ेंस के सम्बन्ध में जागरुक किया गया जनपदीय पुलिस द्वारा आगामी त्यौहार व जनपद में शांति व्यवस्था, सतर्कता एवं सुरक्षा को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु अपने-अपने थाना क्षेत्रो में फ्लैग मार्च/पैदल गस्त किया गया बलात्कार व जान से मारने की धमकी के मामले में वांछित अभियुक्त के विरुद्ध कार्रवाईमिशन शक्ति फेज 5.0(ii) अभियान व ऑपरेशन मजनू, नारी सुरक्षा, साइबर जागरूकता, बेटी बहू सम्मेलन के तहत थाना सिद्धार्थनगर मिशन शक्ति टीम द्वारा थानाक्षेत्र के राजकिय उद्धान पार्क में बालिकाओं/महिलाओं को मिशन शक्ति, सरकार के विभिन्न सरकारी योजनाओं व महिला अपराध, साइबर जागरुकता के तहत पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गया थाना लोटन मिशन शक्ति टीम द्वारा मिशन शक्ति फेज 5.0(द्वितीय चरण) के तहत बहु बेटी सम्मेलन, महिला सशक्तिकरण के क्रम में थानाक्षेत्र के ग्राम-केनवनिया की महिलाओं व बालिकाओ को महिला संबंधी अपराध, साइबर अपराध व उससे बचाव के संबंध मे पम्पलेट वितरीत कर जागरुक किया गयामिशन शक्ति फेज 5.0 (द्वितीय चरण) अभियान के तहत थाना उसका बाजार की मिशन शक्ति टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम उसका राजा की महिलाओं/बालिकाओं को एकत्रित कर महिला अपराध, साइबर अपराध व उससे बचाव के सम्बन्ध में जागरूक किया गया थाना सिद्धार्थनगर पुलिस द्वारा छिनैती की घटना कारित करने वाले एक नफर अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया तथा कब्जे से छिनैती का मोबाइल व घटना में प्रयुक्त दो पहिया बाइक बरामद थाना सिद्धार्थनगर पुलिस द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए गुमशुदा बच्ची वैभवी को उनके परिजनो को बुलाकर सुपुर्द किया गया थाना कपिलवस्तु मिशन शक्ति टीम द्वारा मिशन शक्ति फेज 5.0(द्वितीय चरण) के तहत बहु बेटी सम्मेलन, महिला सशक्तिकरण के क्रम में थानाक्षेत्र के कस्बा अलीगढ़वा की महिलाओं व बालिकाओ को महिला संबंधी अपराध, साइबर अपराध व उससे बचाव के संबंध मे पम्पलेट वितरीत कर जागरुक किया गया नारी शक्ति को सलाम उत्कृष्ट योगदान पर 51 महिलाओं का हुआ सम्मानसिद्धार्थनगर 27 अगस्त 2026/जिला स्वास्थ्य समिति (डी0एच0एस0) एवं स्वास्थ्य विभाग से संबधित योजनाओ की समीक्षा बैठक जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी.एन. की अध्यक्षता एवं मुख्य विकास अधिकारी  बलराम सिंह की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुईविश्व कल्याण के लिए गोरखपुर में भव्य रुद्राभिषेकमिशन शक्ति फेज 5.0 (द्वितीय चरण) अभियान के तहत थाना इटवा मिशन शक्ति टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम महादेव घुरहू में बहू-बेटी सम्मेलन व साइबर जागरूकता अभियान के तहत चौपाल लगाकर बालिकाओं/महिलाओं को महिला अपराध व उससे बचाव के सम्बन्ध मे जागरूक किया गया मिशन शक्ति फेज 5.0 (द्वितीय चरण) अभियान के तहत थाना गोल्हौरा मिशन शक्ति टीम द्वारा थानाक्षेत्र के एस एन टी पब्लिक स्कूल मऊ की छात्र/छात्राओं को महिला अपराध, साइबर अपराध व उससे बचाव के सम्बन्ध में जागरूक किया गया कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सिद्धार्थनगरमिशन शक्ति फेज 5.0 (द्वितीय चरण) अभियान के तहत थाना ढ़ेबरुआ की मिशन शक्ति टीम द्वारा थानाक्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय भरौली की बालिकाओं को महिला अपराध, साइबर अपराध व उससे बचाव के सम्बन्ध में पम्पलेट वितरित कर जागरूक किया गया डॉ0 अभिषेक महाजन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर ने जनता दर्शन में आये फरियादियों की समस्याएं/शिकायतों को सुना संजय सेठ के जन्मदिन पर शुभ चिंतको का शुभकामनाओ का लगा रहा ताता विनय वर्मा
सिद्धार्थनगर

अपने नन्हे-मुन्नों को दिन में दो घन्टे खुला आसमान दिखाइए, चश्मे से बचाइए- डॉ0 अमित शर्मा

मोबाइल-टीवी की लत से तेजी से मायोपिया के मामले बढ़ रहे हैं। बाहर खेलना और धूप में समय बिताना सरल बचाव बन सकता है। बीते कुछ वर्षों में 05 से 10 साल की उम्र वाले बच्चों में चश्मा लगने के मामले कई गुना बढ़ गये हैं। सीपीयन आई केयर सेन्टर परसा के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ0 अमित शर्मा बताते हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण मोबाइल, टीवी और टैबलेट की बढ़ती आदत और बाहर खेलने के समय में लगातार कमी है। एम्स और अन्य संस्थानों की रिपोर्टों में साफ कहा गया है कि बच्चों में मायोपिया के केस पिछले दो दशकों में कई गुना तक बढ़ चुके हैं और अगर हालात नहीं बदले तो आने वाले वर्षों में अधिकतर बच्चों को कम उम्र में ही स्थायी चश्मे का सहारा लेना पड़ सकता है। आंख छोटी स्क्रीन को नजदीक से और लगातार देखने पर आंखों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे निकट दृष्टिदोष (मायोपिया) तेजी से विकसित होता है। वहीं जब बच्चा बाहर प्राकृतिक रोशनी में समय बिताता है तो रेटिना पर पड़ने वाली रोशनी और शरीर में बनने वाला विटामिन D आंखों के लिए सुरक्षात्मक भूमिका निभाते हैं और मायोपिया की प्रगति धीमी हो सकती है। वही कई अध्ययनों में पाया गया है कि जो बच्चे रोज कम से कम दो घन्टे खुली धूप या खुले आसमान के नीचे खेलते हैं, उनमें दृष्टि कमजोर होने का खतरा उन बच्चों की तुलना में काफी कम होता है जो दिन भर घर के अन्दर स्क्रीन से चिपके रहते हैं। डॉ0 अमित शर्मा सलाह देते हैं कि माता-पिता सबसे पहले अपने घर में स्क्रीन इस्तेमाल की स्पष्ट मर्यादा तय करें। 02 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना और बड़े बच्चों के लिए पढ़ाई सहित कुल स्क्रीन टाइम को सीमित घन्टों में बांटना आवश्यक है। हर 20 मिनट बाद 20 सेकण्ड के लिए 20 फीट दूर देखने वाला नियम (20–20–20 रूल) अपनाने से भी आंखों पर पड़ने वाला तनाव घटाया जा सकता है। साथ ही, बच्चों के स्कूल बैग के साथ‑साथ उनकी आउटडोर गतिविधि का “टाइमटेबल” भी बनाना होगा, ताकि रोजाना कम से कम 90 से 120 मिनट वह पार्क, मैदान या छत पर खुले आसमान के नीचे सक्रिय रह सकें। डॉ0 अमित शर्मा यह भी मानते हैं कि केवल चश्मा लगवा देना समाधान नहीं है, बल्कि मायोपिया की स्पीड को धीमा करने के लिए नियमित फॉलो‑अप और समुचित जीवनशैली जरूरी है।सन्तुलित आहार, पर्याप्त नींद, शरीर की सम्पूर्ण व्यायाम और समय-समय पर आंखों की जांच से भविष्य में होने वाले गम्भीर परिणाम जैसे हाई मायोपिया, रेटिना की बीमारियां और समय से पहले कम दृष्टि का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। आज जरूरत है कि परिवार, स्कूल और समाज मिलकर बच्चों को “डिजिटल कैद” से निकालें और उन्हें फिर से आसमान, पेड़‑पौधों और मैदानों से जोड़ें। अगर प्रत्येक अभिभावक यह संकल्प ले कि दिन में कम से कम दो घन्टे वह अपने बच्चे को स्क्रीन से दूर रखकर बाहर ले जायेगा, तो आने वाली पीढ़ी की आंखों को अन्धेरे भविष्य से बचाया जा सकता है।