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सिद्धार्थनगर प्रेस क्लब चुनाव को लेकर दिग्गजों ने नामांकन पत्र दाखिल किया, जिला अध्यक्ष पद पर पांच उम्मीदवार गोनरा मोड़ पर सिद्धार्थनगर प्रीमियर लीग टूर्नामेंट का भव्य आयोजनअपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर द्वारा आपरेशन कवच के तहत एसएसबी व इंडो नेपाल सीमावर्ती ग्राम सुरक्षा समिति के सदस्यों के साथ बैठक किया गयाथाना खेसरहा पुलिस द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में वांछित अभियुक्तगण को गिरफ्तार किया गया तथा आवश्यक विधिक कार्यवाही पूर्ण करते हुए माननीय न्यायालय भेजामिशन शक्ति फेज 5.0 द्वितीय चरण के तहत थाना खेसरहा मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम कड़जा में बालिकाओं/महिलाओं को महिला अपराध व उससे बचाव तथा साइबर अपराध सुरक्षा व विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों, आदि के बारे में पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गयादिनांक 02 अप्रैल 2026 को जिला कारागार सिद्धार्थनगर में दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय एवं मानवीय पहल की गईमिशन शक्ति फेज 5.0 द्वितीय चरण के तहत थाना भवानीगंज मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम हिसामुद्दीनपुर में बालिकाओं/महिलाओं को महिला अपराध व उससे बचाव तथा साइबर अपराध सुरक्षा व विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों, आदि के बारे में पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गयामिशन शक्ति फेज 5.0 द्वितीय चरण के तहत थाना पथरा बाजार मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थानाक्षेत्र के कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय बनगवा में बालिकाओं को महिला अपराध व उससे बचाव तथा साइबर अपराध सुरक्षा व विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों, आदि के बारे में पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गयामिशन शक्ति फेज 5.0 द्वितीय चरण के तहत थाना शोहरतगढ़ मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम बसंतपुर में महिलाओं/बालिकाओं को महिला अपराध व उससे बचाव तथा साइबर अपराध सुरक्षा व विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों, आदि के बारे में पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गयामिशन शक्ति फेज 5.0 द्वितीय चरण के तहत थाना ढ़ेबरुआ मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम संसरी में महिलाओं/बालिकाओं को महिला अपराध व उससे बचाव तथा साइबर अपराध सुरक्षा व विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों, आदि के बारे में पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गयामिशन शक्ति फेज 5.0 द्वितीय चरण के तहत थाना इटवा मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थानाक्षेत्र के ग्राम सिंदुरी के श्री हरिराम शर्मा पब्लिक इंटर कॉलेज की छात्र-छात्राओं को महिला अपराध व उससे बचाव तथा साइबर अपराध सुरक्षा व विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों, आदि के बारे में पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गयामिशन शक्ति फेज 5.0 द्वितीय चरण के तहत थाना गोल्हौरा मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थानाक्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खखरा खखरी की बालिकाओ को महिला अपराध व उससे बचाव तथा साइबर अपराध सुरक्षा व विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों, आदि के बारे में पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गयाथाना चिल्हिया पुलिस द्वारा 01 नफर वारण्टी को गिरफ्तार किया गया तथा आवश्यक विधिक कार्यवाही पूर्ण कर माननीय न्यायालय भेजा गया क्षेत्राधिकारी शोहरतगढ़ द्वारा सर्किल शोहरतगढ़ के सभी थानों पर स्थापित साइबर हेल्प डेस्क के प्रभारियों व कर्मचारियों के साथ गोष्ठी की गयी तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये मिशन शक्ति फेज 5.0 द्वितीय चरण के तहत थाना शिवनगर डिड़ई मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थानाक्षेत्र के रीड पब्लिक कान्वेंट स्कूल की बालिकाओ को महिला अपराध व उससे बचाव तथा साइबर अपराध सुरक्षा व विभिन्न हेल्पलाइन नम्बरों, आदि के बारे में पम्पलेट वितरित कर जागरुक किया गयामिशन शक्ति फेज 5.0 (द्वितीय चरण) अभियान के क्रम में थाना मोहाना मिशन शक्ति पुलिस टीम द्वारा थाना क्षेत्र के ग्राम पनेरी टोला महदेवा की बालिकाओं/महिलाओं को महिला सुरक्षा, मिशन शक्ति अभियान, नये कानून, साइबर अपराध सुरक्षा व एंटी रोमियो अभियान के तहत जागरूक किया गया जनपदीय एन्टी थेफ़्ट व थाना बांसी पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा 02 शातिर चोरों को किया गया गिरफ्तार थाना पथरा बाजार पुलिस द्वारा “हत्या के प्रयास” के आरोप में वांछित अभियुक्त को किया गया गिरफ्तारखीरी में ‘साइबर लूट’ का खुला खेल: क्या जनसेवा केंद्र बन गए हैं ठगी के अड्डे ? पुलिस की चुप्पी पर उठे गंभीर सवालजनपदीय एण्टी रोमियो स्क्वाड पुलिस टीम द्वारा मिशन शक्ति फेज 5.0 (द्वितीय चरण) के अन्तर्गत जनपद के थाना क्षेत्र मोहाना के कंपोजिट विद्यालय रमजाननगर के बच्चों को गुड टच बैड टच व भीड़-भाड़ वाले स्थानों व मनचलों एवं शोहदों की चेकिंग की गयी 
सिद्धार्थनगर

अपने नन्हे-मुन्नों को दिन में दो घन्टे खुला आसमान दिखाइए, चश्मे से बचाइए- डॉ0 अमित शर्मा

मोबाइल-टीवी की लत से तेजी से मायोपिया के मामले बढ़ रहे हैं। बाहर खेलना और धूप में समय बिताना सरल बचाव बन सकता है। बीते कुछ वर्षों में 05 से 10 साल की उम्र वाले बच्चों में चश्मा लगने के मामले कई गुना बढ़ गये हैं। सीपीयन आई केयर सेन्टर परसा के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ0 अमित शर्मा बताते हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण मोबाइल, टीवी और टैबलेट की बढ़ती आदत और बाहर खेलने के समय में लगातार कमी है। एम्स और अन्य संस्थानों की रिपोर्टों में साफ कहा गया है कि बच्चों में मायोपिया के केस पिछले दो दशकों में कई गुना तक बढ़ चुके हैं और अगर हालात नहीं बदले तो आने वाले वर्षों में अधिकतर बच्चों को कम उम्र में ही स्थायी चश्मे का सहारा लेना पड़ सकता है। आंख छोटी स्क्रीन को नजदीक से और लगातार देखने पर आंखों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे निकट दृष्टिदोष (मायोपिया) तेजी से विकसित होता है। वहीं जब बच्चा बाहर प्राकृतिक रोशनी में समय बिताता है तो रेटिना पर पड़ने वाली रोशनी और शरीर में बनने वाला विटामिन D आंखों के लिए सुरक्षात्मक भूमिका निभाते हैं और मायोपिया की प्रगति धीमी हो सकती है। वही कई अध्ययनों में पाया गया है कि जो बच्चे रोज कम से कम दो घन्टे खुली धूप या खुले आसमान के नीचे खेलते हैं, उनमें दृष्टि कमजोर होने का खतरा उन बच्चों की तुलना में काफी कम होता है जो दिन भर घर के अन्दर स्क्रीन से चिपके रहते हैं। डॉ0 अमित शर्मा सलाह देते हैं कि माता-पिता सबसे पहले अपने घर में स्क्रीन इस्तेमाल की स्पष्ट मर्यादा तय करें। 02 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना और बड़े बच्चों के लिए पढ़ाई सहित कुल स्क्रीन टाइम को सीमित घन्टों में बांटना आवश्यक है। हर 20 मिनट बाद 20 सेकण्ड के लिए 20 फीट दूर देखने वाला नियम (20–20–20 रूल) अपनाने से भी आंखों पर पड़ने वाला तनाव घटाया जा सकता है। साथ ही, बच्चों के स्कूल बैग के साथ‑साथ उनकी आउटडोर गतिविधि का “टाइमटेबल” भी बनाना होगा, ताकि रोजाना कम से कम 90 से 120 मिनट वह पार्क, मैदान या छत पर खुले आसमान के नीचे सक्रिय रह सकें। डॉ0 अमित शर्मा यह भी मानते हैं कि केवल चश्मा लगवा देना समाधान नहीं है, बल्कि मायोपिया की स्पीड को धीमा करने के लिए नियमित फॉलो‑अप और समुचित जीवनशैली जरूरी है।सन्तुलित आहार, पर्याप्त नींद, शरीर की सम्पूर्ण व्यायाम और समय-समय पर आंखों की जांच से भविष्य में होने वाले गम्भीर परिणाम जैसे हाई मायोपिया, रेटिना की बीमारियां और समय से पहले कम दृष्टि का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। आज जरूरत है कि परिवार, स्कूल और समाज मिलकर बच्चों को “डिजिटल कैद” से निकालें और उन्हें फिर से आसमान, पेड़‑पौधों और मैदानों से जोड़ें। अगर प्रत्येक अभिभावक यह संकल्प ले कि दिन में कम से कम दो घन्टे वह अपने बच्चे को स्क्रीन से दूर रखकर बाहर ले जायेगा, तो आने वाली पीढ़ी की आंखों को अन्धेरे भविष्य से बचाया जा सकता है।